प्रबंध सम्पादक :
अंजली सहाय
डेढ दशक से प्रिंट, इलेक्ट्रालिक मीडिया और
N.G.O के साथ सक्रिय भागीदारी. शिक्षा-एम.ए
हिन्दी, एम. ए समाजशास्त्र,
पत्रकारिता एवं जन संचार और कम्प्यूटर.
जंगल लाइफ' डेवलप करते
समय मेरे मन मे उदासी और अकेलापन था पर जैसे जैसे
'जंगल लाइफ'
आकार लेता गया मेरा जुड़ाव बढ़ने लगा और मैं आनंद लेने लगी। यहॉ तक कि
वर्षो से कैमरे में पड़ी तस्वीरें तक जीवन्त होने लगी,
जंगल से जुड़ी तमाम बातें याद आने लगी जिन्हें हमने कभी जंगल
के परिप्रेक्ष्य में रख कर देखा ही नहीं था। जैसे बचपन में पढ़ी और
सुनी लकड़हारे की कहानियाँ, जातक कथाएं....
थोड़ा और आगे बढ़ी तो स्त्री विमर्श पर सती सावित्री की कहानी,
उसके बाद भगवान राम का वनवास सीता हरण,
कृष्ण लीला, महाभारत का युद्व,
गुरूकुल शिक्षा की प्रासंगिकता आदि। इसी बीच मुझे कई वर्ष
पूर्व घटित सरिस्का अभ्यारण्य की एक घटना याद आयी जब पैन्थर गांव की
तरफ आकर आंतक फैला रहा था और जिसे पकड़ने के प्रयास में वन विभाग के
एक अधिकारी ने पैंथर से संघर्ष करते
हुए अपना घूंसा उसके मुंह में ठूंस दिया था। पैंथर तो खैर
जैसे तैसे टेंप हो गया, पर अधिकारी का
हाथ बुरी तरह जख्मी हो गया। कर्ज के बोझ तले दब कर किसानो द्वारा की
जाने वाली आत्महत्या भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए सबसे
बुरी खबर है,
भारत के किसानों ने इतिहास के
विभिन्न दौर में जाने कितने कष्ट और यातनाएं सही हैं;
पर शायद ही कभी उनके मन में आत्महत्या का विचार आया हो। मिसाल
के तौर पर मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास 'गोदान'
के नायक नायिका होरी और धनिया को लें। इसका कारण साफ है कि
प्रकृति के बीच निरन्तर कर्मरत और संघर्षरत व्यक्ति का मन इतना
अस्वस्थ नहीं हो सकता की वह जीवन लीला खत्म करने की ठान लें।
इन तमाम बातों को कहने का आशय था,
कि जो कुछ भी घटता है वो सब साहित्य के रूप में पढ़ा जाता है।
प्रकृति तो लेखकों के लिए प्रेरणा की स्रोत है। इन्हीं विचारों के
साथ 'इन्द्रधनुष इन्डिया'
पत्रिका का मानस बना जिसमें जीवन के सब रंग समाहित हों।
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सम्पादक :
डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल
जन्म :
24
नवम्बर, 1945,
उदयपुर.
शिक्षा :
एम. ए.,
पी-एच.डी.
(हिन्दी)
सेवा : 7
जुलाई,
1967
से राजस्थान
सरकार की कॉलेज शिक्षा सेवा में. भीनमाल,
चित्तौड़गढ़,
सिरोही,
आबू
रोड में व्याख्याता;
कोटपुतली,
सिरोही में उपाचार्य;
तथा
सिरोही,
आबूरोड,
जालोर में प्राचार्य रहने के बाद 30
नवम्बर,
2003
को निदेशालय
(अब आयुक्तालय) कॉलेज शिक्षा,
राजस्थान,
जयपुर में संयुक्त निदेशक के पद से सेवा निवृत्त.
हिन्दी कथा
साहित्य की आलोचना में विशेष रुचि,
साथ
ही विविध सम-सामयिक
विषयों पर नियमित लेखन. देश व हिन्दी की लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं
में प्रकाशित. इण्टरनेट पर भी अनेक रचनाएं. अंग्रेज़ी से हिन्दी में खूब
अनुवाद.
पूर्व विदेश
मंत्री श्री नटवर सिंह की संस्मरणात्मक पुस्तक का हाल ही में प्रकाशित
'चेहरे
और चिट्ठियां'
शीर्षक
अनुवाद प्रशंसित. अनेक सम्पादन भी. लगभग दस पुस्तकें प्रकाशित. अनेक संकलनों
में लेख आदि संकलित.
अमरीका
यात्रा के अनुभवों पर आधारित नवीनतम पुस्तक
'आंखन
देखी'
खूब
चर्चित. आकाशवाणी व दूरदर्शन से नियमित प्रसारण.
भरपूर
अध्ययन के अतिरिक्त अध्यापन,
सभी किस्म
के साहित्य,
फिल्म,
संगीत,
नृत्य,
फोटोग्राफी,
प्रसारण,
सम्प्रेषण,
संचार,
टेक्नोलॉजी आदि में गहरी दिलचस्पी. सभी क्षेत्रों की नवीनतम गतिविधियों,
प्रवृत्तियों और प्रविधियों की जानकारी और उनके
प्रयोग की गहरी उत्कण्ठा.
तीन विदेश यात्राएं.
परिवार :
पत्नी और अपने-अपने
जीवन में सुस्थापित एक बेटी तथा एक बेटा.
सम्प्रति :
जयपुर में निवास और अपने मन का पढ़ना-लिखना.
 सम्पर्क
:
ई-2/211,
चित्रकूट,
जयपुर- 302 021.
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