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@ आपने
लिखा है :
इन्द्रधनुष का सितम्बर 2007 अंक पढा, बहुत अच्छा लगा. यह पत्रिका दिनों दिन
उत्कृष्ट होती जा रही है. यह हिन्दी साहित्य के लिए अच्चा संकेत है. मेरी बहुत बहुत
शुभकामनाएं. मेजर रतन जांगिड, जयपुर.
jangidr@IOCL.CO.IN
आपका यह अभिनव प्रयोग चिरायु हो.
अनंत शुभकामनाएं.कई बार कुछ अंश पढने में नहीं आता. देखें.
डॉ दुष्यंत, जयपुर
dr.dushyant@gmail.com
इन्द्रधनुष की सामग्री में लगातार सुधार हो रहा है, यह देखकर खुशी होती है. आपके
प्रयास सफल हों, यही कामना है.
रेखा मिश्रा, यवतमाल
आपने इन्द्रधनुष के माध्यम से हिन्दी की श्रेष्ठ रचनाशीलता को व्यापक पाठक वर्ग
देने का जो कार्य प्रारम्भ किया है, उसकी मैं भरपूर प्रशंसा करता हूं. मेरा सुझाव
है कि आप हर अंक में हमारी विरासत से कुछ दिया करें.
विवेक मठारू, पिलानी
अब इन्द्रधनुष के नए अंक की बेसब्री से इंतज़ार रहती है. आप उत्कृष्ट और लोकप्रिय के
बीच जो संतुलन कायम करते हैं, वह न केवल प्रशंसनीय है, अनुकरणीय भी है. बधाई.
दिवाकर मेहता, भावनगर
मैं इन्द्रधनुष के नए अंक में सबसे पहले ‘बचपन’ को देखती हूं. आपकी पत्रिका से मुझे
अपने बच्चों के लिए बहुत बढिया कविताएं मिलती हैं. मेरे आभार स्वीकार कीजिए.
पुष्पा खुल्लर, मॉंट्रियल
dpagrawal24@gmail.com
anjalisahai_60@rediffmail.com
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