नवम्बर2007   

                           

प्रकृति और साहित्य को समर्पित

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एक अथक यात्रा - पड़ाव : 11वीं महिला

(NOBEL2007WINNER)

                                  डॉ कविता वाचक्नवी
 
 
इस वर्ष साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व 22 अक्तूबर 1919 को जन्मीं ( 88 वर्ष की होने जा रहीं) डोरिस लेसिंग का जन्म पर्शिया(आज के ईरान) मे हुआ। बहुत घटनापूर्ण एवम् कठिन जीवन के संघर्षों से तपी डोरिस, जो 30वर्ष की आयु से ब्रिटेन में हैं, का 1950 में पहला उपन्यास ' द ग्रास इज़ सिंगिंग ' नाम से प्रकाशित हुआ था।
 
इनके माता-पिता दोनों ब्रिटिश थे। पिता पर्शिया के इम्पीरियल बैंक में क्लर्क व माँ एक नर्स थीं। 1925 में परिवार (आज के) जिम्बाब्वे में स्थानांतरित हो गया। जिन सपनों को लेकर वे यहाँ आए थे- वे चकनाचूर हो गए। लेसिंग के अनुसार उनका बचपन सुख व दु:ख की छाया था,जिसमें सुख कम व पीड़ा का अंश ही अधिक रहा। अपने भाई हैरी के साथ प्राकृतिक जगत् के रहस्यों को बूझने में लगी लेसिंग को अनुशासन, घरेलू साफ़- सफ़ाई व घरेलू तथा सामान्य लड़की बनाने आदि के प्रति माँ बहुत सतर्क व कठोर रहीं। 13 वर्ष की आयु में लेसिंग की विधिवत् शिक्षा का अंत हो गया । किंतु ये अन्य दक्षिण अफ़्रीकी लेखिकाओं की भाँति न रह कर शिक्षा से वहीं विरत न हो गईं अपितु स्वयम् ही शिक्षार्जन की दिशा में बढ़ती रहीं । अभी पिछले दिनों दिए इनके एक वक्तव्य के अनुसार--" दु:खी बचपन 'फ़िक्शन"(लेखन) का जनक होता है, मेरे विचार से यह बात सोलह आने सही है" ।
 
इनके 2 विवाह हुए। पहला 1939 में फ़्रैन्क विज़डम से, जिससे इन्हें 2 बच्चे हुए। किन्तु यह सम्बंध 4 वर्ष ही रहा और 1943 में तलाक हो गया। दूसरा विवाह एक जर्मन राजनैतिक कार्यकर्ता गॉटफ्रीड लेसिंग से किया जिसकी परिणति भी 1949 में तलाक के रूप में हुई। इस विवाह से हुए एकमात्र बेटे को लेकर ये ब्रिटेन आ गई थीं। ब्रिटिश कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य रह चुकी डोरिस ने 1954 में पार्टी ही छोड़ दी ।
 
अपने आरम्भिक दिनों में लेसिंग ने डिकेंस, स्कॊट,स्टीवेन्सन, किपलिंग, डी.ऎच. लोरेन्स, स्टेन्थॊल, टॊल्स्टॊय, डास्टाव्स्की आदि को जी भ­र पढ़ा। अपने लेखकीय व्यक्तित्व में माँ की सुनाई परीकथाओं की बड़ी भूमिका को डोरिस रेखांकित करती हैं। प्रथम विश्वयुद्ध में अपंग हो चुके पिता की स्मृतियाँ इन्हें अभी भी आती हैं। 15 वर्ष की आयु में घर से दूर घरेलू-नर्स की नौकरी अपनाने के बाद मालिकों द्वारा उपलब्ध कराई गई राजनीति व समाजशास्त्र की पुस्तकें पढ़तीं।
 
19 वर्ष की आयु में 1937 में सैलिस्बरी आने पर टेलेफ़ोन ऒपरेटर के रूप में भी इन्होंने कार्य किया। यहीं उनका पहला व दूसरा विवाह हुआ। पश्चात् दूसरे विवाह से हुए बेटे के साथ 1949 में लंदन चली गईं। इसी वर्ष पहला उपन्यास " द सिंगिंग ग्रास " प्रकाशित हुआ और यहीं से विधिवत् इनके लेखकीय 'करियर' की शुरुआत हुई।
 
 
इनका साहित्य अधिकांश अपने अफ़्रीका के जीवनानुभ­वों से जुड़ा है, जिसमें बचपन की स्मृतियाँ, राजनीति से जुड़ाव व समाज-संलग्नता ही अधिकाँश है। साँस्कृतिक टकराव, जड़ों में जमा अन्याय, वर्णभेद, आत्मद्रोह, आत्मद्वन्द्व की स्थितियाँ इनके साहित्य में बहुतायत से हैं। दक्षिण अफ़्रीका में श्वेत उपनिवेशवाद के प्रति असहमत लेखन के कारण 1956 में इन्हें वर्जित लेखक तक घोषित कर दिया गया।
उपन्यास, कहानी, कविता, नाटक, एकाँकी, आदि विधाओं के अतिरिक्त भी इन्होंने लिखा है। "अडर माई स्किन:वोल्यूम वन ऒफ़ माई आटोबॊयोग्राफ़ी टू1949" (1995 में प्रकाशित) के लिए इन्हें 'जेम्स टैईट ब्लैक प्राईज़' से सम्मानित किया गया।
 
1995 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने इन्हें ऒनरेरी डिग्री प्रदान की। इसी वर्ष ये 40 वर्ष बाद पुन: दक्षिणी अफ़्रीका गईं और बेटी व नाते - पोतियों से मिलीं। 40 वर्ष पूर्व जिस लेखन के लिए इन्हें प्रतिबन्धित व निष्कासित किया गया था, उसी लेखन के कारण इस बार इनका वहाँ गर्मजोशी से स्वागत-सत्कार किया गया ।
 
1954 से 2005 तक देश विदेश में अपने साहित्य व लेखन पर मिले अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों व पुरस्कारों की श्रॄंखला में 2007 का 'नोबेल' साहित्य पुरस्कार इस वर्ष इन्हें मिला है। इनका नवीनतम उपन्यास है - " The Cleft " | जिसका कथानक समुद्र के किनारे रहने वाले स्त्री-समुदाय ‘क्लेफ़्ट’ पर केन्द्रित है। यह समुद्र के तटों पर रहने वाली महिलाओं का अतिप्राचीन समुदाय ऐसा है, जिसे पुरुषों के अस्तित्व के विषय तक में कुछ ज्ञात नहीं। ये सदा से बिना पुरुषों के रहती आने वाली प्रजाति है, जिनका प्रजनन भी चंद्रमा की गति से संचालित होता है, इन्हें कभी पुरुषों की आवश्यकता तक नहीं अनुभव हुई होती। इस समुदाय में उत्पन्न होने वाली सभी सन्तानें भी लड़कियाँ ही होती हैं। किन्तु अकस्मात् एक दिन एक महिला एक विचित्र शिशु को जनमती है, जिसे देखकर पूरे समुदाय में अचम्भा व घबराहट भर जाती है। यह शिशु एक लड़का होता है। इस समुदाय के जीवन की खोज व उन तक पहुँचने का कार्य, मानव-उत्पत्ति के रहस्यों की खोज मे लगे एक रोमन सीनेटर से जुड़ा है, जो जीवन के अन्तिम चरण में बड़े जुगुप्सा भाव से अपने मानवजाति की उत्पत्ति के कारणों व रहस्यों पर जानकारियाँ जुटाने व उन्हें हल कर लेने की अपनी जिद में लगा है।इस पुरुष- सन्तान के जन्म से ऐसी स्थितियाँ बनती हैं कि पूरा समुदाय समुदाय- भावना से विरत हो जाता है, सामंजस्य टूट- बिखर जाता है व आगे का सामजिक जीवन तक इस एक घटना के परिणामों को भुगतता है।
आज भी वे निरन्तर जागरूकता से लिख रही हैं व इतना ही नहीं वे अपने ब्लॊग पर भी लोगों से लगातार सम्वाद में हैं।
उनकी पुस्तकों की सूची इस प्रकार से है------
 
 
Ben, in the World (2000)
 
Briefing for a Descent into Hell (1971)
 
Canopus in Argos: Archives (series)
 
 
Children of Violence (series)
The Cleft (2007)
 
The Diaries of Jane Somers (1984)
 
The Diary of a Good Neighbour by Jane Somers (1983)
 
The Doris Lessing Reader (1989)
The Fifth Child (1989)
 

 
The Four-Gated City Children of Violence (1969)
The Golden Notebook (1962)
 
The Good Terrorist (1985)
 
The Grass is Singing (1950)
 
If the Old Could by Jane Somers (1984)
 
Landlocked Children of Violence (1965)
 
Love, Again (1996)
 
The Making of the Representative for Planet 8 Canopus in Argos: Archives (1982)
 
Mara and Dann An Adventure (1999
The Marriages Between Zones Three, Four, and Five Canopus in Argos: Archives (1980)
 
Martha Quest Children of Violence (1952)
The Memoirs of a Survivor (1974)
 
Playing the Game Illustrated by Charlie Adlard 1995)
 
A Proper Marriage (1954)
A Ripple from the Storm (1958)
The Sentimental Agents in the Volyen Empire Canopus in Argos: Archives (1983)
 
Shikasta Re: Colonised Planet 5 - Canopus In Argos: Archives (1979)
 
The Sirian Experiments Canopus in Argos: Archives (1980)
The Story of General Dann and Mara's Daughter, Griot and the snow dog (2006)
 
The Summer Before the Dark
The Sweetest Dream (2002)
 
African Stories (1964)
 
The Black Madonna
 
The Doris Lessing Reader
 
Five (1953)
 
The Grandmothers (2003)
The Habit of Loving (1957)
London Observed Stories & Sketches (1992)
 
A Man and Two Women (1963)
The Old Age of El Magnifico (2000)
 
Particularly Cats
 
Particularly Cats and More Cats (1989)
 
Particularly Cats...and Rufus
 
The Pit (1996)
 
The Real Thing Stories & Sketches (1992)
Spies I Have Known and other stories (1995)
Stories (1978)
The Story of a Non-Marrying Man
The Sun Between Their Feet Collected African Stories-Volume Two
The Temptation of Jack Orkney & Other Stories (1978)
The Temptation of Jack Orkney Collected Stories Volume Two
 
This Was the Old Chief's Country (1951)
 
This Was the Old Chief's Country Collected African Stories-Volume One
 
To Room Nineteen Collected Stories Volume One (1978)
 
Winter in July (1966)
 
Through The Tunnel A Creative Short Story (1990)
 
 
 
 
African Laughter four visits to Zimbabwe (1992)
 
Conversations - edited by Earl G. Ingersoll (1994)
Going Home (1957)
In Pursuit of the English (1960)
The Old Age of El Magnifico
 
On Cats (2002)
 
Particularly Cats
 
Particularly Cats and More Cats
 
Particularly Cats...and Rufus (1993)
 
Problems, Myths and Stories (1999)
Putting the Questions Differently - edited by Earl G. Ingersoll
 
Shadows on the Wall of the Cave (1994)
A Small Personal Voice - Essays, Reviews, Interviews (1994)
Time Bites (2004)
 
Under My Skin Volume One of My Autobiography, to 1949 (1994)
Walking in the Shade Volume Two of My Autobiography, 1949 to 1962 (1997)
The Wind Blows Away Our Words (1987)
Each His Own Wilderness (1959)
Play with a Tiger and Other Plays (1996)
The wolf People- INPOPA Anthology ( 2002)
Putting the Question differently (1996)
The Good Terrorist (1985)
Prisons We Choose to Live Inside (1987)
 
 
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कविता
 
Fourteen Poems(1959)
इन कविताओं के शीर्षक हैं----

    'Under a Low Cold Sky'
    Older Woman to Younger Man (1)
    Older Woman to Younger Man (2)
    Plea for the Hated Dead Woman
    Bars
    Dark Girl's Song
    New Man
    Night-Talk
    Song
    Exiled
    "Oh Cherry Trees you are too white for my heart'
    Fable
    In Time of Dryness
    Jealousy

     

 

हमें जीने दो

 बचाओ बच्चों को कोल्ड-कफ सिरप से

 

प्रणय गर्ग

 

दर्द निवारक दवाओं के दुष्प्रभावों पर मचे हो हल्ले के बाद अब अमरीका में काउण्टर पर खुले आम  बेची जाने वाली (ओवर द काउण्टर-OTC)  खांसी जुखाम की दवाओं पर हल्ला मचा है. 11 अक्टूबर 2007 को वहां खांसी जुखाम की 14 लोकप्रिय और सुरक्षित तथा प्रभावी समझी जाने वाली दवाओं को वापस लेने का एलान कर दिया गया है. कहना अनावश्यक है कि इस निर्णय से दवा कम्पनियों को लाखों-करोडों डॉलर का नुकसान होगा. अमरीका में लोग बहुत जल्दी अदालत में जाकर न्याय प्राप्त कर लेते हैं. अगर किसी कम्पनी के विरुद्ध फैसला होता है तो उसकी प्रतिष्ठा को भी गहरा आघात पहुंचता है. इसलिए जॉनसन एण्ड जॉनसन जैसी बडी कम्पनी ने तुरत फुरत ही अपनी पीडियाकेयर ब्राण्ड की पांच और टाइलिनोल की दो फॉर्मूलेशंस, नोवार्टिस ने ट्राइमिनिक इंफैण्ट टोइलर थिन स्ट्रिप्स डिकंजेस्टेण्ट एवम कफ सिरप प्रिपेरेशंस, वाएथ ने डाइमेप्प ड्रॉप्स, और प्लस कफ ड्रॉप्स, और प्रेस्टिज ब्राण्ड होल्डिंग की लिट्ल कोल्ड्स को बाज़ार से वापस ले लिया.

यह सब अचानक नहीं हुआ है. पिछले एक साल से दवा सुरक्षा विशेषज्ञ वहां की एफ डी ए को दो साल से छोटे बच्चों के लिए प्रचलित खांसी जुखाम की दवाओं के हानिप्रद प्रभावों के बारे में सप्रमाण चेतावनियां दे रहे थे. वे कह रहे थे कि इन दवाओं के दुष्परिणामों में एलर्जी, चक्कर आना, कंपकंपी होना, हेल्यूसिनेशन और यहां तक कि मृत्यु तक शामिल है.  शिकागो विश्वविद्यालय के शिशु श्वास और संक्रमण रोग विशेषज्ञ डॉ रॉबर्ट डॉन ने 19 अक्टूबर 2007 की अपनी रपट में इन दवाओं के प्रभाव और उपयोगिता पर अनेक सवाल खडे किए हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इन दवाओं के बच्चों पर असर के जो आंकडे प्रचारित किए जाते हैं वस्तुत: वे वयस्कों द्वारा ली जा रही दवा के आंकडों पर ही आधारित हैं. स्वाभाविक है कि बच्चों पर इन दवाओं के असर के आंकडों पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए. इन्हीं कारणों से अमरीकी दवा प्रशासन ने इन दवाओं के परिपत्रों, सूचना अंकन, लेबलिंग आदि में अनेक परिवर्तन किए और दो वर्ष तक की उम्र के बच्चों के लिए इनका प्रयोग वर्जित किया.

 

इण्डियन एकेडेमी ऑफ  पीडियाट्रिक्स की मारवाड शाखा के अध्यक्ष डॉ हरीश भुरानी के अनुसार क्योंकि भारत में अमरीका के ऎफ डी ऎ जैसी कोई शीर्ष नियंत्रक एजेंसी नहीं है, कल्पना की ज सकती है कि अधिकांश अनुपयोगी कफ कोल्ड सिरप किस तरह का अनिष्ट कर रही होंगी. भारतीय दवा प्रशासन की उदासीनता का फायदा उठा कर ये नुस्खा मुक्त और नुस्खा युक्त दवाएं सरे आम बेची जा रही हैं. पूर्व दवा प्रतिनिधि अनिल जोशी और इन पंक्तियों के लेखक द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि चेरीकोफ, फेंसीडिल, ग्लाय्कोडीन, कोरेक्स, पायरिटोंस, पीडिया, अलेक्स-पी, टी-मिनि, बेनाड्रिल जैसी अधिका6श दवाओं की खुराक आधे से एक चम्मच प्रतिदिन 3-4 बार निर्दिष्ट है. इनमें से अधिकांश दवाओं में दो वर्ष से कम उम्र के बच्कों के लिए सुरक्षा,मात्रा और सम्भावित खतरे का कोई उल्लेख नहीं है. यहां तक कि खुराक की सही मात्रा सुनिश्चित करने वाले पन्द्रह पैसे की लागत के मापक कप तक को देने में भी कोताही बरती जाती है. मात्रा के रूप में चम्मच का उल्लेख इसलिए बेमानी है कि भारतीय रसोई में पाये जाने वाले चम्मच का कोई मानक नहीं है, इस कारण निश्चित से दो गुनी तक दवा दी जाने की आशंका रहती है.  इसी तरह, दवा की पैकिंग पर ठण्डी जगह (25 से 30 डिग्री सेल्सियस) और  अन्धेरे स्थान पर दवा रखने की हिदायत का भारतीय सन्दर्भ में कितना पालन हो पाता है, यह बताना अनावश्यक है.

 

हमारा कहना यही है कि अमरीका में इन दवाओं पर उठे बवाल के बाद अब हमारा ध्यान भी इस तरफ जाना चाहिए कि ये दवाएं कितनी लाभप्रद हैं, और कितनी बेकार या हानिप्रद.

◙◙◙

(दवा विशेषज्ञ और कंज़्यूमर एक्टिविस्ट प्रणय गर्ग इन्द्रधनुष इण्डिया के पाठकों के लिए सुपरिचित हैं.)

 

सम्पर्क : बी-11, अग्रवाल कॉलोनी, रातानाडा, जोधपुर.

 

 

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                                           प्रबंध सम्पादक अंजली सहाय सम्पादक  डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल