मार्च  2007

izd`fr vkSj lkfgR; dks lefiZr

होम
माह का विचार
सम्पादकीय
कविता
कहानी
लेख
व्यंग्य
पुस्तक समीक्षा
बचपन
साहित्यिक हलचल
सम्पर्क सूत्र
और बहुत कुछ...
 


 

   बचपन   

       लाल टमाटर  

   मेहुल कापड़िया

     गोल-गोल ये लाल टमाटर

होते जिससे गाल टमाटर

खून बढ़ाता लाल टमाटर

फुर्ती लाता लाल टमाटर

स्वास्थ्य बनाता लाल टमाटर

मस्त बनाता लाल टमाटर

हम खायेंगे लाल टमाटर

बन जायेंगे लाल टमाटर !******

 

     चिड़िया बोली        सुधा शाहाणे

       चिड़िया  बोली कुट-कुट-कुट

मुझको दे दो दो बिस्कुट

भूख लगी है खाऊंगी

खाकर फिर से जाऊंगी

दूध मलाई रखी है

पर इसमें तो मक्खी है

कैसे खाऊं कैसे खाऊं

चलो भूखी ही सो जाऊं. *******

 

हाथी राजा

           रोहन गुप्ता

    हाथी राजा कहां चले

सूंड हिलाकर कहां चले

मेरे घर भी आओ ना

हलवा पूरी खाओ ना

आओ बैठो कुरसी पर

कुरसी बोली चटर पटर चटर पटर. *****

 

शेर निराला

           विवेक शाह

शेर निराला हिम्मतवाला

लम्बी लम्बी मूंछोंवाला

भागो भागो आया है शेर

दौड़ो दौड़ो आया है शेर. *****

 

भोली गाय

         विवेक शाह

   कितनी भोली कितनी प्यारी

सब पशुओं से न्यारी गाय

सारा दूध हमें दे देती

आओ इसे पिलायें चाय .****

 

सफेद

       श्वेता सिंह

     पर्वत पर की बर्फ सफेद

सागर का है झाग सफेद

दादाजी के बाल सफेद

हम सबके हैं दांत सफेद

दूध सफेद और दही सफेद

मैडम जी की चॉक सफेद.*****

 top       प्रतिक्रिया     *    

 

शहद की पिचकारी

               lk/kuk lksyadh   

            

 

तितली बोली फूल से

उड़ चल मेरे संग,

आसमान में खेलेंगे

होलीे के सब रंग,

फूल बसंती हंस दिया

झटपट लाया चंग;

और गालों पर तितली

के रगड़ दिया मकरंद

भंवरे का मुह फूल गया

भूला गुनगुन छंद,

तितली मुझको भूल गई

आज लड़ुगा जंग

मधुमखी के घर दौड़ा

सेना लाया संग,

6ाहद की पिचकारियां

मचा जोर हुड़दंग

तितली बोली फूल से

उड़ चल मेरे संग।

साधना सोलंकी

जयपुर

 

 top       प्रतिक्रिया     *    

                             प्रबंध सम्पादक : अंजली सहाय सम्पादक : डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल