|
चाट
मसालों,
बिस्कुट,
मक्खन
आदि
की
पैकिंग
पर
छोटे
अक्षरों
में
किसी
जगह
छुपी
आवश्यक
जानकारियां
मसलन
मैन्यूफ़ैक्चरिंग,
एक्स्पायरी,
बेस्ट
बिफ़ोर,और
मूल्य
देखे
बगैर
ही
उन्हें
खा
लें
तो
जान
खतरे
में
नहीं
पडती,
लेकिन
जब
यही
सब
कुछ
दवाओं
के
साथ
भी
तो
जान
पर
बन
आना
स्वाभाविक
है।
अक्सर
बैच
नम्बर,
एक्स्पायरी,
कीमत
आदि
दवाओं
की
स्ट्रिप
पर
कोने
में,
दो
गोलियों/कैप्सूल
पर
छपी
होती
है।
इन
दो
का
अगर
पहले
उपयोग
कर
लें
तो
शेष
आठ
के
बारे
में
कुछ
भी
जान
पाना
असम्भव
है।किसी
अनहोनी-अप्रिय
घटना
जैसे
ड्रग
रिएक्शन,
साइद
इफ़ेक्ट
आदि
के
लिए
इन
प्र
कोई
सबूत
नहीं
बचता।
यानि,
इण्डियन
एवीडेंस
एक्ट
1872 की
धारा
62 के
तहत
साक्ष्य
जुटा
पाना
नामुमकिन!
जय
नारायण
व्यास
विश्वविद्यालय
के
सह
आचार्य
डॉ
आर
एस
डूंगावत
के
निर्देशन
में
शोधरत
इन
पंक्तियों
के
लेखक
प्रणय
कुमार
गर्ग,
एडवोकेट
रामेश्वर
हेडाऊ
और
राजस्थान
ज्यूडिशियल
सर्विस
की
आकांक्षी
सुश्री
अंशुमा
ने
दवाओं
के
1057
नमूनों
का
विस्तृत
अध्ययन
किया।57
केमिस्टों
से
एकत्र
किए
गए
रेण्डम
सेम्पल्स
में
चौंकाने
वाले
तथ्य
उजागर
हुए।
91 प्रतिशत
दवाओं
में
बैच
नम्बर,
उत्पादन
और
मियाद
तिथि
तथा
मूल्य
स्ट्रिप
के
आकार
के
अनुपात
में
इतना
छोटा
पाया
गया
कि
उसे
पढ
पाना
लगभग
असम्भव
था।
voveron, Becozyme,Stugil
उन
5 प्रतिशत
दवाओं
में
थीं
जिन्हें
इस
बात
का
अपवाद
कहा
जा
सकता
है।शेष
4 प्रतिशत
पर
अंकन
संतोषप्रद
था।
नीचे
दी
गई
तालिका
में
उक्त
91 प्रतिशत
दवाओं
में
से
कुछ
का
विवरण
दिया
जा
रहा
है।अफ़सोस
की
बात
यह
कि
दवा
की
स्ट्रिप
चाहे
10 की
हो,
20 की
या
25 की,
समस्या
एक
सी
है।
|
S.No. |
Medicine Name |
Company Name |
Mfg.Date |
Exp.Date |
Pack |
Price |
Batch No. |
|
1. |
Nice |
Dr. Reddy’s Lab |
Jan ‘07 |
Dec ‘09 |
10 |
32.00 |
V70030 |
|
2. |
Crocin |
Glaxo Smith Kline |
Oct ‘05 |
Sep ‘08 |
15 |
12.95 |
R5336 |
|
3. |
Diclogesic |
Torrent |
Aug ‘06 |
Aug ‘06 |
10 |
25.70 |
2066051 |
|
4. |
Statix-10 |
Biocon |
Dec ‘05 |
Jan ‘10 |
15 |
45.00 |
BFO50150 |
|
5. |
Cifran |
Ranbaxy |
Feb ‘07 |
Jan ‘10 |
10 |
96.60 |
9001206 |
|
6. |
Ciplox |
Cipla |
Nov ‘06 |
Oct ‘19 |
10 |
85.73 |
D61965 |
|
7. |
Lipril |
Lupin |
Feb ‘07 |
Jan ‘10 |
15 |
71.48 |
A7004WB |
|
8. |
Calpol |
Glaxo Smith Kline |
Oct ‘06 |
Sep ‘09 |
10 |
10.50 |
EN 134 |
|
9. |
Glyciphage |
Franco |
Jan ‘07 |
Dec ‘09 |
20 |
20.55 |
7010 |
|
10. |
Autrin |
Wyeth |
Nov ‘06 |
Apr ‘08 |
30 |
43.54 |
AV 373 |
इस
अध्ययन
से
यह
बात
भी
उजागर
होती
है
कि
मात्र
कानूनी
प्रावधानों
की
खानापूर्ति
कर
स्वास्थ्य
को
पूरी
तरह
व्यावसायिक,
बल्कि
मुनाफ़ा
कमाने
का
धन्धा
समझने
वाली
भारतीय
दवा
कम्पनियां
अपने
ही
उपभोक्ता
के
भले
के
लिए,
उसे
जागरूक
बनाने
के
लिये
कुछ
भी
करना
ज़रूरी
नहीं
मानती।
वे
चाहें
तो
यह
बता
सकती
हैं
कि
बुखार
कम
करने
वाली
क्रोसिन/कालपोल
(पैरासिटामोल)
और
अनेक
एण्टीबायोटिक्स
और
कोलेस्ट्रॉल
घटाने
वाली
दवाएं
जैसे
एटोरस्टोटिन
अगर
खट्टे
फ़लों
या
नीबू
पानी
के
साथ
लेंगे
तो
ये
नुकसानदायक
सिद्ध
हो
सकती
हैं।
दवा
कम्पनियां
यह
सारा
दायित्व
डॉक्टर
का
बता
कर
पल्ला
झटक
लेती
हैं।
डॉक्टर
के
पास
हर
मरीज़
के
लिए
इतना
समय
कहां
होता
है?
हर
मरीज़
को
ये
सारी
जानकारियां
याद
हों,
यह
भी
स्वाभाविक
नहीं।
हमें
लगता
है
कि
यह
उपभोक्ता
संरक्षण
अधिनियम
1986
संशोधन 2002
एवम
नियम
2004 की
धारा
2 के
द्वारा
प्रदत्त
अधिकारों
का
स्पष्ट
उल्लंघन
है।
इसी
तरह
सेलकल
व
सेलिक्रिट
नाम
ध्वनि
साम्य
के
कारण
भ्रम
पैदा
कर्ते
हैं।ड़रग्स
एवम
कॉस्मेटिक्स
एक्ट
1940
सेक्शन 17
के
तहत
सक्षम
अधिकारी
को
भ्रम
पैदा
करने
वाले
नाम,
पैकेजिंग,
बाह्य
आवरण
आदि
के
लिए
उत्तरदायी
बताया
गया
है।
अब
ट्रेड
मार्क
कार्यलय
में
अनुसंधान
रिपोर्ट
दवा
कम्पनियां
तो
प्रस्तुत
करने
से
रहीं।
यह
सारी
जांच
पडताल
ड्रग
ऑथोरिटी
के
भरोसे
है,
और
उसका
तंत्र
इतना
कमज़ोर
है
कि
अन्धेर
नगरी
चौपट
राजा
वाली
बात
याद
आती
है।
डॉ
डूंगावत
का
मानना
है
कि
एडवर्टाइजिंग
स्टेण्डर्ड
काउन्सिल
ऑफ़
इण्डिया
को
खुद
अपनी
तरफ़
से
पहल
करके
दवाओं
के
लिए
एक
मानक
बाह्य
आवरण
तैयार
करना
चाहिये
ताकि
सब
कुछ
राम
भरोसे
न
चलतता
रहे
, कुछ
लगाम
तो
दवा
कम्पनियों
पर
भी
लगे।
qqq
बी-11,
अग्रवाल
कॉलोनी,
रातानाडा,
जोधपुर
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