जून 2007             

प्रकृति और साहित्य को समर्पित

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     प्रतिक्रिया    

 आपने लिखा है :

  

प्रणय गर्ग का लेख हमारी आंखें खोलता है कि कैसे हमारे देश में मरीज़ों की अनदेखी की जाती है। मेरा मानना है कि उपभोक्ता संरक्षण मंचों को आगे आकर इस तरह की दवाओं के उपयोग को रोकना चाहिये। ऐसा उपयोगी लेख देने के लिए लेखक और इन्द्रधनुष दोनों के प्रति आभार।

आनन्द कुमार गर्ग (asbs_garg@yahoo.co.in)

 

मुझे खेद है कि मैं हिन्दी में टाइप नहीं कर सकता हूं। आपकी पत्रिका ज़ोरदार है। मैंने तो इस तरह का काम पहली बार देखा है।

-अशोक सिंघल (ashokdarshan@sancharnet.in)

 

आपका हिन्दी फ़ॉण्ट मुझे नहीं मिल रहा है। मैं यह मैगज़ीन नहीं पढ पा रही हूं।

रुचि अग्रवाल (ruchi_09reporter@rediffmail.com)

रुचि जी, हम लोग यूनीकोड फ़ॉण्ट्स का प्रयोग करते हैं। अगर आपके कम्प्यूटर पर विण्डोज़ एक्स पी है तो कोई समस्या नहीं होनी चाहिये। - सम्पादक

 

  dpagrawal24@gmail.com

   anjalisahai_60@rediffmail.com

 

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                             प्रबंध सम्पादक : अंजली सहाय सम्पादक : डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल