|
@ आपने
लिखा है :
इन्द्रधनुष इण्डिया विलक्षण है। आपको
बहुत बहुत बधाई। आपकी सक्रियता प्रेरणादायक है। आंखों की दिक्कत के कारण मैं
कम्प्यूटर पर नहीं बैठ पाता, मुझे अफ़सोस है कि मैं आपको बराबर वह प्रतिक्रिया नहीं
दे सका जो देना चाहता था।
उपध्यान चन्द्र कोचर, बीकानेर
uck_25@yahoo.com
इन्द्रधनुष इण्डिया का स्वरूप और सामग्री निरन्तर बेहतर होते जा रहे हैं।
शुभकामनायें।
राजेश, गुवाहाटी
मैं इन्द्रधनुष इण्डिया के नए अंक की प्रतीक्षा ही कर रहा था। सरसरी तौर पर सारी
सामग्री देख गया हूं। आपने अपने सम्पादकीय में बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे उठाये हैं।
यह वाकैइ दुर्भाग्यपूर्ण है कि हममें से ज़्यादातर को नियमों का पालन करके नहीं,
उन्हें तोड कर खुशी होती है। अगर आप किसी को ऐसा करने से रोकने की कोशिश करें तो
बहुत सम्भव है कि वह आपको भी उपदेश दे डाले – यहां सन्त बनने से कोई काम नहीं होता।
दो चार गालियां दो, पैसा फ़ेंको, सब हो जाएगा।
डॉ अरविन्द भावे, सिएटल,अमरीका
इन्द्रधनुष इण्डिया के जून अंक में हरीश करमचदाणी की कविताएं बहुत बढिया हैं।
विशाल मेंहदीरत्ता, गुलबर्गा
सलीम खां फ़रीद की गज़लों में एक खास तरह की ताज़गी है जो इधर दुर्लभ हो चली है। मेरा
अनुरोध है कि आप इस शायर की और भी रचनाएं उपलब्ध कराएं।
अनुराधा प्रकाश, नागपुर
इन्द्रधनुष में आप साहित्यिकता और सामाजिकता में जिस तरह समन्वय करते हैं वह मुझे
बहुत अच्छा लगता है। काश हिन्दी की तथाकथित घोर साहित्यिक पत्रिकाएं भी आपसे कुछ
सीखें।
गुरदयाल सिंह बिर्क, सिरसा
dpagrawal24@gmail.com
anjalisahai_60@rediffmail.com
|