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वक़्त हो गया

मेरे जाने का वक़्त हो गया,

कोई साजो-सामान नहीं साथ

पीछे छोड़ता हूं फक्त.........

 वैलेण्टाइन दिवस पर ....

  एक अनूठी प्रेम गाथा सारस की !

   श्रद्धांजलि      

 वरिष्ठ लेखक कमलेश्वर अब हमारे बीच नहीं रहे।

साहित्य जगत को अपने योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2006 में पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया.

साहित्य अकादमी ने उन्हें उनके उपन्यास, 'कितने पाकिस्तान' के

 लिए 2003 में अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया था. 

उनके उपन्यास........

 *कितने पाकिस्तान* का अंश

  और उनकी कहानी 'चप्पल'

 

कहानी

ठाकुर का कुऑ - प्रेमचंद

वह अमेरिकन कन्या       

पीस को हिन्दी में शान्ति कहते है। इस कन्या का नाम शान्ति रहेगा। वे खुश हो गए। बोले - सैन्टी। ओह नाईस ! उसी दिन से वह कन्या सैन्टी ( शान्ति ) हो गई।

           डॉ0 बच्चन पाठक ' सलिल'
कविता
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लो फिर बसन्तआया......सुमनमेहरोत्रा मेरी खिड़की पर ऋत.. डा०सुदेश बत्रा

 गोविन्द माथुर की चार कविताएं

मैं बन्द घड़ी में/समय देखता हूं.......

आशुतोष कुमार

    मैच हो तो भारत पाकिस्तान का हो क्रिकेट मैच....... 

   प्रह्लाद श्रीमाली   बीती विभावरी जाग री......

दिन : अपने आगोश में लपेट...डाo अपर्णा चतुर्वेदी 

    लेख दिल करता है ब्लॉग -ब्लॉग              डॉ. विश्वंभर व्यास   ठाकुर का कुआं और दलित

             रत्न कुमार सांभरिया

ऐसा आता है अवनी पर बसन्त-

                 कमलेश माथुर

 व्यंग्य

घायल बसन्त- हरिशंकर परसाई

ठंड : आजादी : समाजवाद- गोपाल प्रसाद व्यास

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बची हुई हंसी .... डॉ हेतु भारद्वाज

बचपन

बच्चों को श्रीमती गुलाब कल्ला की भेंट

--दुर्गाप्रसाद अग्रवाल
साहित्यिक हलचल राजस्थान की राजधानी, गुलाबी नगरी जयपुर में विरासत महोत्सव के क्रम में तीन दिन साहित्य को भी समर्पित रहे.

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                          प्रबंध सम्पादक : अंजली सहाय  सम्पादक : डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल