दिंसबर 2007

     

 यूनीकोड फ़ॉण्ट्स

प्रकृति और साहित्य को समर्पित

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 हम लोग

 


 

अपनी पीड़ा तो पशु-पक्षी भी महसूस करते हैं, मनुष्य वह है जो दूसरों की वेदना को अनुभव करे .

  

  कविता
तीन  गज़लें -
 सुरेन्द्र श्लेश
 दो कविताएं- हरीश करमचंदाणी
इस तरह तो मत होना उदास
पिता बोले थे सदा सच बोलना
धोनी की बल्लेबाज़ी और मैं
वेणु गोपाल
जब से वह प्रेम से जुड़ी है
सुनीता जैन 
ममत्व-न दुर्लभ हैं-
डॉ महेंद्र भटनागर
कहानियां

आसान नहीं है रास्ता-    नंद भारद्वाज
 काकी की सौगंध -
मेजर रतन जांगिड़ 
लघुकथाएं
मंशा-
सुनील कुमार सुमन
विडंबना-कुंकुम गुप्ता
जब मैं स्त्री हूं रन्जना जायसवाल
लेख
कविता : जीवन और प्रकृति- विजेन्द्र

बचाओ दवाओं के बढते दामों से !
                प्रणय गर्ग

 
व्यंग्य
आध्यात्मिक पागलों का मिशन
                हरिशंकर परसाईं 
ज़ठरागिन का महात्म्य
                 डा० यश गोयल

   बचपन
जानकारी-
गंगाजल ख़राब क्यों नहीं होता

और बहुत कुछ -

संस्कारहीन संस्कृति या संस्कृतिहीन संस्कार- हेतु भारद्वाज

 

पुस्तक समीक्षा

अनुवाद-कला पर एक महत्वपूर्ण शोधकृति
              डा0 जीवन सिंह
नेपथ्य के दावेदार: चिकित्सक -मरीज रिश्ता
              डॉ यश गोयल 
एक गाईड-
 राजस्थान में भ्रमण
               रमेश खत्री 

 

अनुरोध

 

 रचनाकार मित्रों से भी हमारा अनुरोध है

 

  कि वे अपनी रचनाएं भेजें।

 

dpagrawal24@gmail.com

 anjalisahai_60@rediffmail.com

 

pl.visit  

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  पर्यावरण में इंटरनेट का योगदान

 प्रकृति संरक्षण

 

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  पिछला अंक 

कविता
मधुर-मधुर मेरे दीपक

             महादेवी वर्मा

दीपों की पांतों         

              डॉ प्रकाश आतुर

 

तुम्हीं से    हरदर्शन सहगल

 

जगमगाए पूरा संसार

             साधना सोलंकी

एक छोटा सा दिया

            डॉ कॄष्णा रावत

प्रजनन      डॉ0 मधु संधु

   हाशिया     डॉ0 मधु संधु

 कहानी
हार की जीत    सुदर्शन

 अधिकार  डॉ श्रीगोपाल काबरा
संवेदनहीनता     शोभा तंवर

लेख
 
साहित्य के समक्ष चुनौतियां
           डॉ माधव हाड़ा  
 

पुस्तक की दयनीय होती स्थिति                मान चंद खण्डेला

सायमा का बयान  यशोदा सिंह
 
व्यंग्य
सूचना का अधिकार : अब सब ओपनीय              आर क़े भंवर 

एक नेता के धंधा बदलने से
     
अविनाश वाचस्पति

बचपन
दीवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा
 

                         अंजली सहाय
 पुस्तक समीक्षा

 स्वयंसम्पूर्ण कविता का स्वप्न

           गिरिराज किराडू 
 
एंटीगनी (ग्रीक नाटक)
            डॉ दुष्यन्त

 पाठक के मर्म को भेदते व्यंग्य

                 रमेश खत्री

और बहुत कुछ
एक अथक यात्रा - पड़ाव : 11वीं महिला 
                      डॉ
कविता वाचक्नवी

बचाओ
 बच्चों को कोल्ड-कफ सिरप से
             प्रणय गर्ग
     

 

 

अंक   जनवरी २००७  फरवरी २००७

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                      प्रबंध सम्पादक अंजली सहाय  सम्पादक डॉ0 दुर्गाप्रसाद अग्रवाल 
                           
anjalisahai_60@rediffmail.com