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अप्रेल को विश्व पुस्तक दिवस है
कहीं तो गई नहीं हैं किताबें. यहीं-यहीं तो हैं
किताबें.
कुछ पीलापन ही तो चढा है,
ऐसा क्या खाक़ गजब हुआ है. थोडा पीला
तो
यह पूरा का पूरा
मुल्क हुआ है......आगे
पृथ्वी दिवस
लुप्त हो
जाएगा जल
दुिनया में १.१
अरब लोगो को साफ पेय जल उपलब्ध नहीं है।
ऎसा माना जा रहा है िक अगर ऎसा ही रहा तो हो सकता है
तीसरा िवश्व युद्ध पानी के िलए हो ।
कविता
ऐसे हालात
में-नंद भारद्वाज
सहोदर से संवाद- नंद भारद्वाज
सम्मान वृद्धजन का--
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चालीस पार प्रेम - सत्यनारायण
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प्रकृति से विच्छेद- डॉ सदाशिव श्रोत्रिय
घर-घर
चैन -चुरैया
-डॉ मनोहर प्रभाकर
लोकप्रिय संगीत पर-गिरिजेश कुमार
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ओहदे की खातिर
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डॉ शिब्बन कृष्ण रैणा
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